रायपुर। छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है और इसी कारण राज्य के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों में चंद्रखुरी का विशेष स्थान है। लेकिन इन दिनों चंद्रखुरी में भगवान श्रीराम की नई प्रतिमा की स्थापना में हो रही देरी चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रतिमा पूरी तरह तैयार होने के बावजूद उसे अब तक स्थापित नहीं किया जा सका है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिमा स्थापना को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। इस बीच मानसून की शुरुआत के साथ प्रतिमा के संरक्षण और रखरखाव को लेकर स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार भगवान श्रीराम की यह प्रतिमा काफी समय पहले तैयार हो चुकी है और स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का इंतजार कर रही है। हालांकि अब तक इसके अनावरण और स्थापना की तिथि घोषित नहीं की गई है। प्रतिमा फिलहाल खुले स्थान पर रखी हुई बताई जा रही है, जहां वह धूप, नमी और बारिश जैसे प्राकृतिक प्रभावों के संपर्क में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से प्रतिमा की गुणवत्ता और स्वरूप प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि इसके संरक्षण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि आस्था से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशासन को अधिक सक्रियता दिखानी चाहिए।
मामले को लेकर जब संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल से सवाल किया गया तो उन्होंने प्रतिमा स्थापना की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई। मंत्री ने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता से देख रही है और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रतिमा की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि उनके बयान के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि स्थापना कार्यक्रम कब आयोजित किया जाएगा। इससे यह संकेत मिला कि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है।
प्रतिमा स्थापना में हो रही देरी अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बनती जा रही है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस प्रदेश को भगवान श्रीराम के ननिहाल का गौरव प्राप्त है, वहां उनकी प्रतिमा को स्थापित करने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है। कई लोगों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब से सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न खड़े होते हैं। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्थापना से जुड़ी औपचारिकताओं और आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही तिथि घोषित की जाएगी। फिलहाल श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार प्रतिमा को सुरक्षित रखने और जल्द स्थापना सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।
चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर और श्रीराम से जुड़े धार्मिक महत्व की जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग की वेबसाइट देखी जा सकती है: छत्तीसगढ़ पर्यटन विभागhttps://www.chhattisgarhtourism.in?utm_source=chatgpt.com







