
पुरी, ओडिशा। 12वीं सदी के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए औपचारिक ड्रेस कोड लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। ओडिशा राज्य विधि आयोग ने मंदिर में पारंपरिक मर्यादा और सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से ड्रेस कोड को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और इसे सख्ती से लागू करने की सिफारिश की है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विश्वनाथ रथ की अगुवाई में तैयार इस प्रस्ताव में मंदिर अधिनियम में संशोधन कर ड्रेस कोड को कानूनी आधार देने की बात कही गई है, जिससे नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रशासन ने पहले ही 1 जनवरी 2024 से हाफ पैंट, फटी जींस और स्लीवलेस कपड़ों पर प्रतिबंध लागू किया था, लेकिन इसके पालन में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। इसी पृष्ठभूमि में अब राज्य सरकार दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों की तर्ज पर सख्त ड्रेस कोड लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के तहत 10 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए साड़ी, ब्लाउज या सलवार-कमीज अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है, जबकि 10 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को फ्रॉक, गाउन या सलवार-कमीज पहनने की अनुमति होगी। पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता, गमछा और पारंपरिक ‘पट्टो’ पहनना उपयुक्त माना गया है।
विधि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों और सेवादारों को सेवा के दौरान अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखना और श्रद्धालुओं के बीच अनुशासन को बढ़ावा देना है। उल्लेखनीय है कि देश के कई प्रमुख मंदिरों जैसे तिरुपति बालाजी मंदिर और पद्मनाभस्वामी मंदिर में पहले से ही सख्त ड्रेस कोड लागू है, जहां पारंपरिक वस्त्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट नियमों के अभाव में अक्सर श्रद्धालु आधुनिक परिधान पहनकर मंदिर पहुंच जाते हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में ड्रेस कोड को कानूनी रूप से परिभाषित करना आवश्यक हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर भी यह माना जा रहा है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश और सख्त निगरानी से ही इस व्यवस्था को सफल बनाया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लागू होने से श्रद्धालुओं को पहले से निर्धारित नियमों के अनुसार तैयारी करनी होगी, जिससे मंदिर परिसर में अनुशासन और परंपरा दोनों का संतुलन बना रहेगा। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट https://jagannath.nic.in पर भी विवरण उपलब्ध है।







