आठवें वेतन आयोग से पहले बढ़ी हलचल, DA फॉर्मूला बदलने की मांग तेज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के प्रस्तावित आठवें वेतन आयोग के गठन से पहले ही कर्मचारियों के बीच मांगों को लेकर हलचल तेज हो गई है। रक्षा कर्मचारियों के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF) ने आयोग के समक्ष अपनी 18 प्रमुख मांगें रखते हुए महंगाई भत्ते की मौजूदा गणना प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान में अपनाया जा रहा फॉर्मूला कर्मचारियों पर पड़ रहे वास्तविक महंगाई के प्रभाव को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं करता, जिससे उनकी क्रय शक्ति प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों का तर्क है कि महंगाई भत्ता केवल औपचारिक वृद्धि बनकर रह गया है और बाजार की वास्तविक कीमतों से इसका तालमेल नहीं बैठ पा रहा है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के 12 महीनों के औसत के आधार पर तय किया जाता है। हालांकि AIDEF का आरोप है कि इस इंडेक्स की गणना में जिन वस्तुओं को शामिल किया गया है, उनकी कीमतें अक्सर सब्सिडी या राशन दरों पर आधारित होती हैं, जबकि वास्तविकता में कर्मचारी खुले बाजार से खरीदारी करते हैं, जहां कीमतें कहीं अधिक होती हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि नए वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ते की गणना के लिए ऐसा इंडेक्स तैयार किया जाए जो वास्तविक रिटेल कीमतों या सरकारी सहकारी स्टोर्स के दरों को ध्यान में रखे, ताकि कर्मचारियों को वास्तविक राहत मिल सके।

इसके अलावा संगठन ने वेतन संरचना और सेवा शर्तों में भी व्यापक बदलाव की मांग की है। वर्तमान में सालाना 3 प्रतिशत की दर से मिलने वाले वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि कर्मचारियों की आय में संतुलित वृद्धि हो सके। साथ ही सबसे अधिक और सबसे कम वेतन के बीच अंतर को 1:10 तक सीमित रखने की मांग भी उठाई गई है, जिससे वेतन असमानता कम की जा सके। रक्षा कर्मचारियों ने अग्निवीर योजना को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए इसे स्थायी सेवा में बदलने की बात कही है। इसके साथ ही सशस्त्र बलों और अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को भी दोहराया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन आयोग के गठन से पहले इस तरह की मांगें कर्मचारियों के बढ़ते असंतोष को दर्शाती हैं, वहीं सरकार के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इन मांगों का सीधा असर राजकोष पर पड़ेगा। वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों द्वारा इन सुझावों का अध्ययन किया जा रहा है और अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जुड़ी हुई है। इस विषय से संबंधित अधिक जानकारी के लिए https://www.finmin.nic.in पर देखा जा सकता है।

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan