मंत्रालय में फर्जी नियुक्ति आदेश से ठगी, 1.50 करोड़ वसूलने वाले दो गिरफ्तार

रायपुर। राजधानी रायपुर में मंत्रालय के नाम पर फर्जी नियुक्ति आदेश जारी कर बेरोजगार युवाओं से करीब 1.50 करोड़ रुपए की ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राखी थाना पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक निजी स्कूल का शिक्षक और दूसरा क्लर्क बताया जा रहा है। दोनों आरोपी मूल रूप से राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र के निवासी हैं और लंबे समय से इस ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सामान्य प्रशासन विभाग के नाम से फर्जी आदेश तैयार कर उसे सोशल मीडिया, विशेषकर व्हाट्सएप के जरिए प्रसारित किया और सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब तीन दर्जन युवक-युवतियों से बड़ी रकम वसूल ली।

मामले का खुलासा तब हुआ जब सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय के अधिकारी राजपाल बघेल ने 24 अप्रैल को थाना राखी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि 5 मार्च 2026 की तारीख वाला एक फर्जी आदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें परिवहन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की अनुशंसा दर्शाई गई थी। इस आदेश में सचिव और उप सचिव के डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग किया गया था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी आदेश के माध्यम से लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगे जा रहे थे। शिकायत मिलते ही पुलिस ने आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विशेष टीम गठित की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने व्हाट्सएप के जरिए प्रसारित संदेशों के स्रोत का पता लगाया और संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया, जिसके आधार पर मुख्य आरोपी की पहचान राजेश शर्मा उर्फ राजू के रूप में हुई। उसकी लोकेशन डोंगरगढ़ में मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची और उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपने साथी मनोज कुमार श्रीवास्तव का नाम बताया, जो एक निजी स्कूल में शिक्षक है। दोनों ने मिलकर कंप्यूटर के जरिए सामान्य प्रशासन विभाग के नाम से फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किए और उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाकर लोगों को ठगने की योजना बनाई थी। आरोपियों ने स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव के चलते उन्होंने इस अपराध को अंजाम दिया। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने भिलाई की एक महिला से नौकरी लगाने के नाम पर 1.90 लाख रुपए लिए थे, जिसे बाद में वापस कर दिया गया था।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कंप्यूटर सेट, प्रिंटर और अन्य उपकरण जब्त किए हैं, जिनका उपयोग फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सरकारी नौकरी से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन के आधिकारिक पोर्टल https://cgstate.gov.in पर जाकर सत्यापन किया जा सकता है।

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan