छत्तीसगढ़ में RTE एडमिशन फिर शुरू, निजी स्कूलों का आंदोलन जारी रहेगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के प्रवेश को लेकर पिछले कई महीनों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने सोमवार 18 मई 2026 से राज्यभर के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया फिर से शुरू करने का फैसला लिया है। संगठन ने कहा है कि यह निर्णय बच्चों के भविष्य और उनकी पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित न हो। हालांकि एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि सरकार के खिलाफ उनका असहयोग आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि निजी स्कूल लंबे समय से आरटीई के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। सरकार द्वारा इस मामले में संतोषजनक निर्णय नहीं लिए जाने से नाराज होकर प्रदेश के निजी स्कूलों ने 1 मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के तहत इस शैक्षणिक सत्र में आरटीई के अंतर्गत गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया गया था। इसके चलते हजारों अभिभावकों और विद्यार्थियों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि अब संगठन ने मानवीय आधार पर अपना फैसला वापस लेते हुए प्रवेश प्रक्रिया बहाल करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि गरीब बच्चों की पढ़ाई बाधित करना उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि सरकार तक अपनी समस्याएं पहुंचाना आंदोलन का मकसद था।

एसोसिएशन ने दावा किया है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी किए गए आरटीई प्रवेश के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि राज्य के 33 में से 29 जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली हैं। संगठन ने इसे अपने आंदोलन का असर बताते हुए कहा कि निजी स्कूलों की एकजुटता के कारण सरकार पर दबाव बना है। दूसरी ओर शिक्षा विभाग अब आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को सामान्य करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है ताकि पात्र बच्चों को समय पर स्कूलों में प्रवेश मिल सके।

निजी स्कूलों और सरकार के बीच विवाद की मुख्य वजह आरटीई के तहत पढ़ाए जाने वाले बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति राशि है। स्कूल संचालकों का कहना है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि वास्तविक खर्चों के मुकाबले काफी कम है, जिससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस मामले को लेकर संगठन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को छह महीने के भीतर संगठन के प्रतिवेदन पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था। निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं होने पर संगठन ने अवमानना याचिका दायर की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभिभावकों और विद्यार्थियों को फिलहाल राहत मिली है कि आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू हो रही है और बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित नहीं होगा।https://eduportal.cg.nic.in/?utm_source=chatgpt.com

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan