कुसमुंडा खदान विस्तार पर फूटा भू-विस्थापितों का गुस्सा, पांच घंटे घेराव

कोरबा। कुसमुंडा खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित गांवों के भू-विस्थापितों का आक्रोश बुधवार को कटघोरा तहसील परिसर के बाहर खुलकर सामने आया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव कर अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों को मुख्य गेट पर ही रोक दिया, जिसके बाद भू-विस्थापित वहीं धरने पर बैठ गए और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब पांच घंटे तक चले इस प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही, जिसने आंदोलन को और व्यापक बना दिया। प्रभावित लोगों का आरोप है कि वर्षों पहले जमीन अधिग्रहित किए जाने के बावजूद उन्हें रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुसमुंडा विस्तार परियोजना के लिए जतराज, पड़निया, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोदरी, चुरैल, अमगांव, खैरभावना और गेवराबस्ती समेत कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आज तक अधिकांश प्रभावित परिवारों को स्पष्ट पुनर्वास योजना नहीं मिल सकी है। लोगों ने आरोप लगाया कि जिन जमीनों को खनन विस्तार के लिए लिया गया, वहां के परिवारों को न तो स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया गया और न ही पर्याप्त मुआवजा दिया गया। कई गांवों में भूमि अधिग्रहण के बाद जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगने से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

धरने में शामिल लोगों ने वर्ष 2023 में कराए गए ड्रोन सर्वे पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि एसईसीएल द्वारा अधिग्रहण वाले गांवों का ड्रोन सर्वे बिना ग्राम सभा की सहमति और स्थानीय लोगों को भरोसे में लिए कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अब उसी सर्वे को आधार बनाकर संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसमें कई नए मकानों और निर्माण कार्यों का उचित आकलन नहीं हुआ है। इससे प्रभावित परिवारों को वास्तविक मुआवजे से वंचित होने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और प्रभावित परिवारों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।

स्थिति को नियंत्रित करने और आंदोलन समाप्त कराने के लिए प्रशासन, राजस्व विभाग और भू-विस्थापितों के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय चर्चा हुई। बैठक के बाद तहसीलदार ने 29 मई को सुबह 11 बजे चंद्रनगर जतराज में विशेष बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया, जिसमें राजस्व विभाग, एसईसीएल दीपका और कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारी मौजूद रहेंगे। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की समस्याओं और मुआवजा संबंधी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद शाम करीब पांच बजे भू-विस्थापितों ने धरना समाप्त कर दिया, हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि समाधान नहीं निकलने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। कुसमुंडा खदान और परियोजना संबंधी आधिकारिक जानकारी SECL की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।https://www.secl-cil.in?utm_source=chatgpt.com

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan