
बिलासपुर। सस्ती दरों पर लग्जरी कार, बाइक और इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध कराने का दावा कर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। सकरी क्षेत्र के गोकुलधाम घुरू निवासी एक युवक ने परिचित पर भरोसा कर करीब 25 लाख 93 हजार रुपये दे दिए, लेकिन बदले में उसे अधूरे सौदे, फाइनेंस पर खरीदी गई गाड़ियां और लगातार टालमटोल ही हाथ लगी। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह मामला एक बार फिर उन बढ़ते साइबर और आर्थिक अपराधों की ओर इशारा करता है, जिनमें भरोसे और आकर्षक ऑफर का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार सकरी क्षेत्र निवासी प्रतीक कुमार सोनी, जो मुंगेली के एक निजी संस्थान में मैनेजर हैं, की पहचान मुंगेली निवासी लक्ष्य सोनी से थी। दोनों के बीच पारिवारिक संबंध और परिचय होने के कारण विश्वास का रिश्ता था। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपी ने दावा किया कि वह एक कंपनी के माध्यम से बाजार मूल्य से काफी कम कीमत में कार, बाइक और इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध करा सकता है। आरोपी ने पहले प्रतीक को करीब 24 लाख रुपये कीमत वाली एमजी हेक्टर कार महज 12.22 लाख रुपये में दिलाने का प्रस्ताव दिया। कथित रूप से अगस्त 2024 के दौरान अलग-अलग तारीखों में आरोपी के बैंक खाते और यूपीआई आईडी पर रकम ट्रांसफर कराई गई। काफी समय तक इंतजार और बहानेबाजी के बाद नवंबर 2024 में आरोपी ने एमजी हेक्टर कार तो उपलब्ध कराई, लेकिन बाद में पता चला कि वाहन फाइनेंस पर खरीदा गया था, जिससे पूरे सौदे को लेकर संदेह गहरा गया।
इसके बाद आरोपी ने करीब 18 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली थार गाड़ी केवल 7.60 लाख रुपये में दिलाने का झांसा दिया। पीड़ित ने भरोसा करते हुए इसके लिए भी रकम दे दी, लेकिन वाहन नहीं मिला और पैसे भी वापस नहीं किए गए। इसी तरह भारी छूट पर स्विफ्ट कार दिलाने के नाम पर 6.11 लाख रुपये और लिए गए, लेकिन बाद में जानकारी सामने आई कि यह वाहन भी फाइनेंस के जरिए खरीदा गया था। शिकायत के मुताबिक आरोपी ने तीन वाहनों के नाम पर कुल 25.93 लाख रुपये प्राप्त किए, जबकि वास्तविक भुगतान केवल 9.50 लाख रुपये का ही किया गया। बाकी 16.43 लाख रुपये वापस नहीं किए गए और रकम मांगने पर आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा।
पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक छूट और बाजार कीमत से बहुत कम दर पर सामान या वाहन दिलाने के दावे अक्सर जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी, वाहन दस्तावेज और वित्तीय प्रक्रिया की पूरी जांच करना जरूरी है। साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी जागरूकता संबंधी जानकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी प्राप्त की जा सकती है।https://cybercrime.gov.in?utm_source=chatgpt.com

