करियर शिविर ने गांव के बच्चों को दिए बड़े सपने

छत्तीसगढ़। ग्रामीण अंचलों में शिक्षा और करियर मार्गदर्शन की कमी के बीच ग्राम कातलबोड़ में आयोजित निःशुल्क शैक्षिक एवं करियर मार्गदर्शन शिविर बच्चों के लिए प्रेरणा और संभावनाओं का नया मंच बनकर उभरा है। साहू समाज बांनगर परिक्षेत्र द्वारा कर्मचारी प्रकोष्ठ के निर्देशन में संचालित इस शिविर ने केवल पढ़ाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षा, संस्कार, सामाजिक जागरूकता और करियर निर्माण को एक साथ जोड़ते हुए ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने का कार्य किया। लगातार चार वर्षों से संचालित यह पहल अब गांवों के विद्यार्थियों के बीच भरोसे का केंद्र बनती जा रही है, जहां आर्थिक संसाधनों की कमी किसी बच्चे के सपनों की बाधा नहीं बन रही। शिविर के दौरान विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की जानकारी, कक्षा 9वीं से 12वीं तक कठिन विषयों की पढ़ाई, संगीत प्रशिक्षण, नैतिक शिक्षा और करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। विशेष बात यह रही कि जिले के कई अधिकारी, शिक्षक और विशेषज्ञ बिना किसी मानदेय के बच्चों को समय देकर उनके भविष्य को संवारने में योगदान दे रहे हैं।

शिविर के समापन समारोह में जिला कलेक्टर ने विद्यार्थियों, पालकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षा को समाज का सबसे बड़ा निवेश बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखते हुए शिक्षा और संस्कार की दिशा में प्रेरित करना अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कलेक्टर ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कक्षा आठवीं के दौरान एक समर कैंप उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ था। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से घबराने के बजाय संघर्ष से सीख लेने और सफलता मिलने पर विनम्र बने रहने की सीख दी। कार्यक्रम में “मैं हूं गुल्लक अभियान” ने भी बच्चों के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया। समाजसेवी तुमनचंद साहू और रंजीता साहू द्वारा करीब 300 बच्चों को गुल्लक और पेंटिंग किट वितरित की गई, जिसके बाद आयोजित प्रतियोगिता में बच्चों ने रंगों के माध्यम से अपने सपनों और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त किया। किसी ने आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा चित्रित की तो किसी ने डॉक्टर, सैनिक, व्यवसायी और पर्यावरण रक्षक बनने का सपना साझा किया। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और पक्षी संरक्षण जैसे विषयों पर बच्चों की जागरूक सोच ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया, जहां कलेक्टर ने मेडल और पुस्तकें प्रदान कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर इस तरह के प्रयास न केवल विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ा रहे हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव भी तैयार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के निःशुल्क शैक्षिक अभियान लगातार जारी रहे, तो ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में बच्चे प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा, सेना और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकते हैं। इस तरह की शैक्षिक और सामाजिक खबरों के लिए अरपा न्यूज़ छत्तीसगढ़ पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।https://www.arpanews36.com?utm_source=chatgpt.com

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan