खजराही तालाब में लौटे प्रवासी पक्षी, संरक्षण नहीं मिला तो बढ़ सकता है संकट

कुरूद। मानसून की पहली बारिश के साथ धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत भखारा-भठेली स्थित खजराही तालाब एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार होने लगा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर सैकड़ों विदेशी पक्षी यहां पहुंचने लगे हैं। पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से यह तालाब प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित प्रवास और प्रजनन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हालांकि पर्यावरण प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जैव विविधता स्थल के संरक्षण और संवर्धन के लिए अभी तक अपेक्षित स्तर पर ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। यदि समय रहते प्रभावी संरक्षण नहीं मिला तो इस प्राकृतिक धरोहर पर संकट गहरा सकता है।

जानकारी के अनुसार मई-जून के दौरान अपने मूल निवास से उड़ान भरकर आने वाले ये प्रवासी पक्षी अक्टूबर-नवंबर तक खजराही तालाब में डेरा जमाए रखते हैं। वर्षा ऋतु इनके प्रजनन का समय होता है, इसलिए तालाब के मध्य स्थित टापू को ये अपना सुरक्षित आशियाना बनाते हैं। चारों ओर पानी से घिरा यह टापू प्राकृतिक रूप से सुरक्षित माना जाता है, जबकि यहां मौजूद बबूल के पेड़ घोंसले बनाने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। तालाब में मछलियां, घोंघे, कीट-पतंगे और अन्य प्राकृतिक खाद्य स्रोत पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने से यह स्थान प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार यहां साइबेरियन क्रेन, फ्लेमिंगो, ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट, कॉमन टील, कॉमन ग्रीनशैंक, नॉर्दर्न पिनटेल, रोजी पेलिकन और वुड सैंडपाइपर जैसी कई प्रजातियां देखी जाती हैं। यही कारण है कि हर वर्ष देश-विदेश के शोधार्थी और पक्षी विशेषज्ञ यहां पहुंचकर इनके प्रवास, प्रजनन और व्यवहार का अध्ययन करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब के बीच स्थित टापू की मिट्टी लगातार कटाव का शिकार हो रही है और कई पेड़ सूखकर गिर चुके हैं। इसके अलावा अनियंत्रित रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियां भी पक्षियों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर रही हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि टापू का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जाए, मिट्टी भराव कराया जाए, पौधरोपण किया जाए और पक्षियों के आवास को सुरक्षित रखा जाए तो यह क्षेत्र भविष्य में पक्षी प्रेमियों, शोधार्थियों और प्रकृति पर्यटन के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है। हालांकि जनप्रतिनिधि और प्रशासन भी इस धरोहर के संरक्षण को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। विधायक अजय चंद्राकर पूर्व में कई बार इस तालाब के संरक्षण की आवश्यकता जता चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय के अनुसार इसके प्राकृतिक स्वरूप में अत्यधिक बदलाव प्रवासी पक्षियों के अनुकूल नहीं होगा, इसलिए विकास कार्यों को पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

हाल ही में पॉन्ड मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रसिद्ध रामवीर तंवर ने विधायक प्रतिनिधि हरख जैन और नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी हरिकिशन पवारिया के साथ खजराही तालाब का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान ड्रोन कैमरे की सहायता से जल क्षेत्र, जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास और तालाब के पारिस्थितिकीय महत्व का वैज्ञानिक आकलन किया गया। रामवीर तंवर ने धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा से मुलाकात कर जिले में जल संरक्षण, तालाबों के विकास और मृत जल निकायों के पुनर्जीवन पर भी चर्चा की। कलेक्टर ने जिले के अन्य तालाबों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रयास किए जाएं तो खजराही तालाब को भविष्य में रामसर साइट के रूप में विकसित कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। इस विषय से संबंधित जानकारी अंतरराष्ट्रीय रामसर कन्वेंशन की आधिकारिक वेबसाइट https://www.ramsar.org/ पर उपलब्ध है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan