छत्तीसगढ़। बस्तर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ विकास कार्यों को गति देने के सरकारी प्रयासों के बीच बीजापुर जिले के भैरमगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र से भ्रष्टाचार और कथित कमीशनखोरी का गंभीर मामला सामने आया है। आदिवासी बहुल और अंदरूनी इलाकों में बनाए जा रहे स्कूल भवनों तथा अन्य निर्माण कार्यों में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने तकनीकी विभाग के एक सब-इंजीनियर पर भारी कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर पांच पंचायतों के सरपंच और प्रतिनिधि एकजुट हो गए हैं तथा उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उच्च अधिकारियों को शिकायत सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि भैरमगढ़ क्षेत्र में पंचायतों को निर्माण एजेंसी बनाकर स्कूल भवन, पुलिया और अन्य विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन तकनीकी स्वीकृति, मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रिया के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नकद राशि के अलावा डिजिटल माध्यमों, विशेषकर फोनपे के जरिए भी कथित रूप से रकम ली गई है। उनका दावा है कि उनके पास बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल भुगतान से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ग्रामीण प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन पंचायतों ने कथित कमीशन देने से इनकार किया, उनके निर्माण कार्यों में तकनीकी कमियां बताकर भुगतान रोक दिया गया या फाइलों को लंबित रखा गया। इसके कारण कई गांवों में स्कूल भवनों का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों बाद आदिवासी बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन भवनों का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन भुगतान में देरी और कथित अवैध वसूली के दबाव के चलते विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने पर संबंधित सब-इंजीनियर के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा आवश्यक होने पर उनका स्थानांतरण किए जाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि होती है तो कथित अवैध संपत्ति और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कराई जानी चाहिए। फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारी या विभाग की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक स्तर पर शिकायत मिलने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू होने पर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी और योजनाओं की विस्तृत जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की वेबसाइट https://prd.cg.gov.in/ देखी जा सकती है।







