सीबीएसई का बड़ा फैसला, 9वीं-10वीं में अब तीन भाषाएं होंगी अनिवार्य

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए नई भाषा नीति लागू करने की घोषणा की है। बोर्ड की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से देशभर के सभी सीबीएसई स्कूलों में प्रभावी हो जाएगी। नई नीति के तहत अब हाई स्कूल के विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना जरूरी होंगी। बोर्ड का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय भाषाई विविधता को बढ़ावा देना है।

सीबीएसई के अनुसार, अब विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ एक अतिरिक्त भारतीय या क्षेत्रीय भाषा चुननी होगी। विदेशी भाषाओं को पूरी तरह हटाया नहीं गया है, लेकिन उनके साथ भारतीय भाषा का चयन अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले कई स्कूलों में छात्र केवल अंग्रेजी और विदेशी भाषाओं के विकल्प के साथ पढ़ाई कर रहे थे। नई नीति लागू होने के बाद भाषा संयोजन का स्वरूप बदल जाएगा। शुरुआती चरण में छात्रों को 6वीं कक्षा स्तर की भाषा पुस्तकों के आधार पर अध्ययन कराया जाएगा ताकि उन्हें नई भाषा को समझने और अपनाने में कठिनाई न हो। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और संचालन प्रक्रिया 15 जून तक जारी कर दी जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत भाषा विषय के अंक 10वीं बोर्ड परीक्षा के मुख्य परिणाम में सीधे तौर पर नहीं जोड़े जाएंगे। छात्रों का मूल्यांकन मुख्य रूप से इंटरनल असेसमेंट और प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा दबाव नहीं पड़ेगा और वे नई भाषा को सहज रूप से सीख सकेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम छात्रों में भाषाई समझ बढ़ाने और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव मजबूत करने में मदद करेगा। हालांकि कई अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन ने शिक्षकों की उपलब्धता और अतिरिक्त संसाधनों को लेकर चिंता भी जताई है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सीबीएसई ने क्लस्टर मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत आसपास के स्कूल आपसी सहयोग से भाषा शिक्षकों की व्यवस्था कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड शिक्षकों और ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों की भी मदद ली जाएगी। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे समय रहते आवश्यक शैक्षणिक और तकनीकी तैयारी पूरी कर लें ताकि नई नीति लागू होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकार इसे भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला मान रहे हैं, जिसका असर आने वाले वर्षों में स्कूली शिक्षा के स्वरूप पर साफ दिखाई दे सकता है।

नई भाषा नीति और दिशा-निर्देशों से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।https://www.cbse.gov.in/?utm_source=chatgpt.com

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan