रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए यह चर्चा महत्वपूर्ण रही, क्योंकि सदन में स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली बार प्राथमिक स्तर पर रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी साझा की। हालांकि सरकार ने रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता स्वीकार की, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की। इससे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मानसून सत्र के दौरान अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक स्थिति पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने प्रदेश में संचालित प्राथमिक स्कूलों की संख्या, स्वीकृत पदों, कार्यरत शिक्षकों और रिक्त पदों का पूरा ब्यौरा मांगते हुए यह भी जानना चाहा कि कितने स्कूल ऐसे हैं जो बिना शिक्षक या केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इसके लिखित उत्तर में स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 22,447 प्राथमिक शालाएं संचालित हैं। इन विद्यालयों में प्राथमिक शिक्षकों के कुल 89,375 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें केवल 58,840 शिक्षक ही कार्यरत हैं। इस प्रकार प्राथमिक स्तर पर 30,535 पद रिक्त हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं। इन आंकड़ों ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक इंद्र साव ने भी सरकार से प्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर रिक्त शैक्षणिक पदों की जानकारी मांगी। उन्होंने सरकार को पूर्व में किए गए उस वादे की याद दिलाई, जिसमें व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के लगभग 57 हजार रिक्त पदों पर भर्ती करने की बात कही गई थी। विधायक ने यह भी पूछा कि 1 जनवरी 2024 से 15 जून 2026 तक कितने नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई और शेष पदों पर भर्ती कब तक पूरी होगी। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन को बताया कि प्रदेश में 36 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और शिक्षा विभाग रिक्त पदों की स्थिति पर लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित विषय शासन स्तर पर विचाराधीन है, लेकिन फिलहाल यह बताना संभव नहीं है कि सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां किस समय तक पूरी हो सकेंगी।
सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कई विद्यालय सीमित शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भर्ती होने से न केवल शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की निगाहें अब सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं। स्कूल शिक्षा विभाग और भर्ती संबंधी आधिकारिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी विभाग की वेबसाइट https://eduportal.cg.nic.in पर अपडेट देख सकते हैं।







