हाईकोर्ट सख्त, नियमित कर्मचारियों को 15 दिन में मिलेगा पूरा वेतन लाभ

छत्तीसगढ़। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में लंबे समय से चल रहे नियमितीकरण विवाद पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर नियमित वेतनमान का लाभ देने का निर्देश दिया है। यह मामला उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिनके नियमितीकरण को लेकर पहले भी हाईकोर्ट आदेश जारी कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं और वेतन लाभ नहीं मिल पाए थे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई, जहां पूर्व आदेशों के पालन नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई की गई।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 6 मार्च 2023 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि संबंधित कर्मचारियों की सेवाओं को 26 अगस्त 2008 से नियमित माना जाएगा और उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सभी लाभ एवं सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अदालत को यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका और पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। इसके बावजूद कर्मचारियों को अब तक नियमित वेतनमान और अन्य लाभ नहीं दिए गए, जिसके चलते कर्मचारियों को फिर से न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। कर्मचारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन नियमितीकरण का दावा तो कर रहा है, लेकिन व्यवहारिक रूप से उन्हें अब भी संविदा या अस्थायी कर्मचारियों की तरह ही देखा जा रहा है।

दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से अदालत में कहा गया कि कर्मचारियों से जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रक्रिया पूरी करने में देरी हुई। इस पर हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्र सभी याचिकाकर्ताओं को 12 मई तक उपलब्ध कराया जाए, ताकि कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकें। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी और नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उसी अनुरूप वेतन प्रदान किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमित वेतनमान का लाभ देना अनिवार्य होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो वर्षों से नियमितीकरण के बाद भी समान वेतन और सेवा लाभों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर राहत और उम्मीद का माहौल है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन अदालत के निर्देशों का पालन तय समय सीमा में किस तरह करता है।

न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों से जुड़ी जानकारी के लिए Supreme Court of India Official Website देखा जा सकता है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan