कुरुद। महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर आयोजित ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ कार्यक्रम में नगर के स्थानीय कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से ऐसा सुरमयी वातावरण बनाया कि पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से भर उठा। न्यू कराओके मेलोडी सिंगर्स ग्रुप कुरुद के बैनर तले मंगल भवन में आयोजित इस संगीत संध्या में रफी साहब को उनके सदाबहार गीतों के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी शामिल हुए और कलाकारों की प्रस्तुति का भरपूर उत्साहवर्धन किया। आयोजन का शुभारंभ भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया, जिसने सांस्कृतिक आयोजनों में सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने कहा कि नगर में सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्माणाधीन एमपी थिएटर सहित विभिन्न सांस्कृतिक पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारणी चंद्राकर ने युवाओं की सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा, खेल और धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में भी नगर की पहचान मजबूत होना समय की मांग है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा ने लंबे समय बाद इस तरह के आयोजन को सुखद बताते हुए पुराने सांस्कृतिक दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ‘अभिव्यक्ति कला मंच’ जैसी संस्थाओं ने नगर को अलग पहचान दिलाई थी और आज भी क्षेत्रीय एवं छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि स्थानीय कला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर और एल्डरमैन भानु चंद्राकर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मोहम्मद रफी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कलाकारों के प्रयासों की सराहना की। मेलोडी सिंगर्स ग्रुप के कलाकार राज देवांगन, मोनिका साहू, कोमल साहू, रिजवान रिजवी, धनसिंह सेन, रफीक हलारी, सूरज देवांगन, भगवान कश्यप, खिलेन्द्र चंद्राकर और सत्या आर्य ने कराओके संगीत की धुनों पर रफी साहब के लोकप्रिय गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। ‘बहारों फूल बरसाओ’, ‘बदन पे सितारे लपेटे हुए’, ‘चलो रे डोली उठाओ कहार’, ‘रिमझिम के गीत सावन गाए’, ‘आने से उसके आए बहार’, ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’, ‘तू मेरे सपनों की रानी बनेगी’, ‘चुरा लिया है दिल ने जो दिल से’, ‘हाय रे हाय नींद नहीं आए’, ‘कितना प्यारा वादा है’ और ‘कौन है जो सपनों में आया’ जैसे सदाबहार गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में उमड़ी संगीत प्रेमियों की भीड़ ने यह साबित किया कि आज भी मोहम्मद रफी के गीत पीढ़ियों को जोड़ने का काम करते हैं और ऐसे सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय कलाकारों को नई ऊर्जा तथा पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोहम्मद रफी के जीवन और संगीत सफर से जुड़ी विस्तृत जानकारी उनकी आधिकारिक जीवनी के लिए https://en.wikipedia.org/wiki/Mohammed_Rafi पर देखी जा सकती है।







