पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, पांच दिन में आम जनता को दूसरा बड़ा झटका

नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी। नई दरों के अनुसार पेट्रोल और डीजल करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि की थी। ऐसे में महज पांच दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यमवर्गीय परिवारों, नौकरीपेशा लोगों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की दरें नए उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव इस वृद्धि की मुख्य वजह है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी अस्थिरता के कारण वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल महंगा हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात आधारित देशों पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली बदलाव का भी सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। पेट्रोलियम कंपनियों ने नई दरें मंगलवार सुबह 6 बजे से देशभर के पेट्रोल पंपों पर लागू कर दी हैं। ताजा ईंधन दरों और शहरवार कीमतों की जानकारी सरकारी तेल विपणन कंपनी Indian Oil Official Website पर देखी जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इसका असर रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई देगा। डीजल महंगा होने से मालवाहक वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ेगा, जिससे फल-सब्जियां, दूध, राशन और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। व्यापार संगठनों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में लगातार इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो परिवहन लागत बढ़ने के कारण बाजार में महंगाई और तेज हो सकती है। दूसरी ओर पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने कहा है कि कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कंपनियों की नीतियों के आधार पर होता है, इसलिए खुदरा विक्रेताओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। रायपुर समेत कई शहरों में लोगों ने सरकार से टैक्स में राहत देने और बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि वैश्विक बाजार स्थिर नहीं हुआ तो ईंधन कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।https://iocl.com?utm_source=chatgpt.com

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan