अब नहीं फटेंगे जेब के नोट! भारत में जल्द आएंगे प्लास्टिक के नए नोट

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की करेंसी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। यदि सभी प्रक्रियाएं तय योजना के अनुसार पूरी होती हैं, तो अगले वर्ष से भारत में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोटों का प्रचलन शुरू हो सकता है। शुरुआत 10 और 20 रुपये के नोटों से किए जाने की संभावना है। इस पहल का उद्देश्य कटे-फटे, गंदे और जल्दी खराब होने वाले कागजी नोटों की समस्या को कम करना, नकली नोटों पर प्रभावी रोक लगाना और नोटों की छपाई व रखरखाव पर होने वाले भारी खर्च में कमी लाना है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से नोटों को जारी करने की अंतिम तिथि की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है और यह पूरी प्रक्रिया परीक्षणों तथा मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।

रिजर्व बैंक की सहयोगी इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलीमर नोटों के लिए आवश्यक विशेष सब्सट्रेट की आपूर्ति और निर्माण संयंत्र स्थापित करने के उद्देश्य से वैश्विक स्तर पर कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इसके लिए 18 अगस्त तक इच्छुक कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। प्रस्तावित प्लास्टिक नोट सामान्य प्लास्टिक की तरह कठोर नहीं होंगे, बल्कि विशेष पॉलीमर सामग्री से तैयार किए जाएंगे, जो हल्के, पतले और लचीले होंगे। इन्हें मौजूदा कागजी नोटों की तरह आसानी से मोड़ा जा सकेगा और आम लोगों को इनके उपयोग में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। साथ ही इनका आकार और डिजाइन भी वर्तमान नोटों से काफी हद तक मिलता-जुलता रखा जाएगा, जिससे इन्हें पहचानना आसान रहेगा।

रिजर्व बैंक के अधिकारियों के अनुसार, पॉलीमर नोटों को सीधे बाजार में जारी नहीं किया जाएगा। इन्हें अंतिम मंजूरी मिलने से पहले सुरक्षा, गुणवत्ता और टिकाऊपन से जुड़े चार अलग-अलग चरणों के परीक्षणों से गुजरना होगा। इन परीक्षणों में यह परखा जाएगा कि अत्यधिक गर्मी, नमी, बारिश और रोजमर्रा के उपयोग के दौरान नोटों की गुणवत्ता कितनी बनी रहती है। इन सभी मानकों पर सफल होने के बाद ही इन्हें आम जनता के लिए जारी किया जाएगा। नई करेंसी में माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम, उन्नत सुरक्षा फीचर और विशेष चुंबकीय स्याही जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे जाली नोट तैयार करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाएगा। इससे नकली करेंसी के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये का खर्च हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह 5,101.4 करोड़ रुपये था। इसी अवधि में लगभग 23.8 अरब पुराने, गंदे और क्षतिग्रस्त नोटों को चलन से हटाकर नष्ट करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोटों की आयु कागज के नोटों की तुलना में कई गुना अधिक होती है, जिससे बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता कम होगी और सरकारी खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर और कई अन्य देशों में पॉलीमर करेंसी वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग में है। भारत में भी यह प्रयोग सफल रहने पर भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों को चरणबद्ध तरीके से पॉलीमर सामग्री में परिवर्तित किया जा सकता है। रिजर्व बैंक से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और अपडेट https://www.rbi.org.in पर देखी जा सकती है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan