टाइगर रिजर्व के 54 गांवों का कलेक्ट्रेट घेराव, तीन दिन का अल्टीमेटम

कुरुद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के करीब 54 गांवों के हजारों ग्रामीणों ने सोमवार को अपनी बुनियादी सुविधाओं की मांगों को लेकर धमतरी कलेक्ट्रेट का घेराव किया। सिहावा और नगरी क्षेत्र से बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण सैकड़ों वाहनों में सवार होकर धमतरी पहुंचे और कलेक्ट्रेट परिसर से कुछ दूरी पर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे कई गांव आज भी सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब सड़क संपर्क टूटने से मरीजों, छात्रों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

दोपहर बाद शुरू हुआ प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा। स्थिति को देखते हुए धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा स्वयं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए सात सूत्रीय मांग पत्र प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्षों से मांगों को लेकर ज्ञापन और आवेदन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, मोबाइल टावर स्थापना, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और क्षेत्र में कार्यरत एक रेंजर के स्थानांतरण सहित कई मांगें प्रशासन के सामने रखीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो व्यापक चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र होने के कारण वहां विकास कार्यों के लिए विशेष नियम और पर्यावरणीय प्रक्रियाएं लागू होती हैं, जिससे कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने में समय लगता है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन मांगों पर तत्काल कार्रवाई संभव है, उन पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। कलेक्टर ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से क्षेत्र में आवश्यक पुल निर्माण के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं और संबंधित विभागों द्वारा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। रेंजर के स्थानांतरण की मांग पर उन्होंने कहा कि शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और आगे का निर्णय राज्य स्तर पर लिया जाएगा।

ग्रामीणों और प्रशासन के बीच हुई चर्चा के दौरान मोबाइल नेटवर्क की समस्या, संचार सुविधाओं के विस्तार और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति बनी। कई बिंदुओं पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने फिलहाल आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया, लेकिन प्रशासन को तीन दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। क्षेत्र के विकास और वन संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांगों का समाधान कितनी तेजी से हो पाता है। टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में विकास कार्यों से संबंधित नियमों की जानकारी के लिए राज्य वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://forest.cg.gov.in का भी अवलोकन किया जा सकता है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan