100 वर्ष पुरानी कृष्ण गाथाओं की धरोहर को मिला राष्ट्रीय सम्मान, रायपुर में सम्मानित हुए पं. रामकृष्ण शुक्ला

रायपुर। भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत “ज्ञान भारतम् मिशन” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में सक्रिय योगदान देने वाले पं. रामकृष्ण शुक्ला को जिला प्रशासन रायपुर द्वारा सम्मानित किया गया। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंह (आईएएस) ने उन्हें सम्मान पत्र प्रदान कर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में उनके योगदान की सराहना की।

ज्ञान भारतम् मिशन, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से देशभर में निजी संग्रहों में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों और दुर्लभ ज्ञान-संपदा का सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत पं. रामकृष्ण शुक्ला ने अपने परिवार के पास पीढ़ियों से सुरक्षित रखी गई दुर्लभ पांडुलिपियों को सर्वेक्षण हेतु उपलब्ध कराया। इनमें छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कीर्तनकार पंडित रामखिलावन शुक्ल द्वारा रचित भगवान श्रीकृष्ण की गाथाओं से संबंधित हस्तलिखित ग्रंथ शामिल हैं, जिनकी आयु लगभग 100 से 150 वर्ष बताई जाती है।

पुरातात्विक विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित इन पांडुलिपियों को शुक्ल परिवार ने कई पीढ़ियों से अत्यंत सावधानी के साथ संरक्षित रखा है। ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत संरक्षक (Custodian) के रूप में पं. रामकृष्ण शुक्ला की सक्रिय सहभागिता को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान माना गया है। सम्मान पत्र में उल्लेख किया गया है कि उनका यह सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के अमूल्य भंडार को सुरक्षित रखने में अत्यंत सराहनीय है।

सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला पंचायत रायपुर, घड़ी चौक द्वारा भी पं. रामकृष्ण शुक्ला को सम्मान पत्र प्रदान किया गया। समारोह के दौरान यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि उन्होंने अपने पिता पं. रामखिलावन शुक्ला की स्मृतियों, साहित्यिक धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है तथा उनके आदर्शों और परंपराओं को जीवित रखने का कार्य किया है। पं. रामखिलावन शुक्ला छत्तीसगढ़ में कीर्तन और भक्ति परंपरा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम रहे हैं, जिनकी रचनाएं आज भी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी परिवारों के पास संरक्षित ऐसी पांडुलिपियां भारत के सामाजिक, धार्मिक और साहित्यिक इतिहास को समझने का महत्वपूर्ण आधार हैं। ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से इन दुर्लभ धरोहरों की पहचान और संरक्षण का कार्य देश की सांस्कृतिक स्मृतियों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ, पांडुलिपियां या ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं, तो वे इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़कर भारत की ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने में अपना योगदान दें।

अभियान से संबंधित अधिक जानकारी संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://www.indiaculture.gov.in पर उपलब्ध है।

Rizwan Rizwi
Author: Rizwan Rizwi