कुरुद। क्षेत्र में सिंचाई के वैकल्पिक साधनों के विस्तार और बेहतर कृषि व्यवस्था का असर इस बार रबी सीजन में साफ दिखाई दे रहा है। बांध का पानी उपलब्ध नहीं होने के बावजूद कृषि उपज मंडी कुरुद में धान की रिकॉर्ड आवक हो रही है। बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने पहुंच रहे हैं, लेकिन मंडी की सीमित क्षमता और पर्याप्त शेड नहीं होने के कारण किसानों को अपनी बारी के लिए घंटों नहीं बल्कि कई बार एक-दो दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे किसानों को आर्थिक और व्यावहारिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि मंडियां किसानों और व्यापारियों के बीच उपज विपणन का प्रमुख माध्यम होती हैं, जहां पर्याप्त भंडारण और व्यवस्था का होना बेहद जरूरी माना जाता है। अधिक जानकारी के लिए कृषि विपणन से जुड़ी जानकारी यहां देखी जा सकती है: https://agriportal.cg.nic.in/
प्रदेश की प्रमुख कृषि मंडियों में गिनी जाने वाली कुरुद मंडी पिछले एक महीने से लगातार व्यस्त बनी हुई है। यहां प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार कट्टा धान की आवक दर्ज की जा रही है। वर्तमान में विभिन्न किस्मों के धान को बाजार में 1700 रुपए से लेकर 2600 रुपए प्रति क्विंटल तक कीमत मिल रही है, जिसके चलते कुरुद, मगरलोड और भखारा के अलावा धमतरी, नगरी, पाटन तथा अभनपुर क्षेत्र के किसान भी अपनी उपज लेकर यहां पहुंच रहे हैं। मंडी में वर्तमान में लगभग 8000 कट्टा क्षमता वाले चार शेड मौजूद हैं, लेकिन व्यापारियों द्वारा खरीदे गए धान के उठाव में समय लगने के कारण उपलब्ध जगह सीमित हो रही है। ऐसे में बाकी शेडों में प्रतिदिन अधिकतम 20 हजार कट्टा धान रखने की व्यवस्था ही बन पा रही है।
मंडी परिसर के बाहर ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में धान भरकर खड़े किसान बताते हैं कि जगह नहीं मिलने के कारण उन्हें धूप और बारिश दोनों परिस्थितियों में इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि शेड में स्थान नहीं मिलने पर उन्हें खुले में धान रखना पड़ रहा है और बारिश से बचाने के लिए अतिरिक्त तिरपाल खरीदने तक की नौबत आ रही है। राखी, बगौद, मोंगरा, कातलबोड, परखंदा और मंदरौद क्षेत्र से पहुंचे किसानों ने बताया कि यह समस्या हर वर्ष सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। मंडी बोर्ड द्वारा नए शेड निर्माण की मंजूरी दिए जाने के बावजूद निर्माण कार्य की धीमी गति किसानों की चिंता बढ़ा रही है। किसानों का आरोप है कि संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की सुस्ती का सीधा असर उन पर पड़ रहा है।
मंडी सचिव राजकुमार रात्रे का कहना है कि निर्धारित क्षमता से अधिक धान की आवक के कारण अस्थायी रूप से जगह की समस्या बनी हुई है। किसानों को राहत देने के लिए मंडी प्रबंधन द्वारा अवकाश वाले दिनों में भी कार्य जारी रखा गया है ताकि धान की खरीदी और उठाव प्रक्रिया तेज हो सके। उनका कहना है कि प्रस्तावित नया शेड तैयार होने के बाद भविष्य में इस प्रकार की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी। फिलहाल मंडी प्रशासन बढ़ती आवक और सीमित संसाधनों के बीच व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहा है, जबकि किसान जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।







