जंगली फूटू की सब्जी बनी आफत, एक ही परिवार के 8 लोग अस्पताल पहुंचे

छत्तीसगढ़। मानसून के मौसम में जंगलों से मिलने वाले जंगली मशरूम, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘फूटू’ कहा जाता है, का सेवन कोंडागांव जिले के पलारी गांव के एक परिवार के लिए भारी पड़ गया। फूटू की सब्जी खाने के कुछ ही घंटों बाद एक ही परिवार के आठ लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सभी को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज ऐंठन की शिकायत होने लगी, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों की मदद से उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताते हुए सभी मरीजों को भर्ती कर उपचार शुरू किया। राहत की बात यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण सभी की हालत अब नियंत्रण में बताई जा रही है, हालांकि डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार परिवार रविवार को जंगल से प्राकृतिक रूप से उगे फूटू लेकर आया था। घर में इसकी सब्जी तैयार की गई और दोपहर के भोजन में परिवार के सदस्यों ने इसका सेवन किया। भोजन के कुछ समय बाद ही एक-एक कर सभी लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। प्रभावित लोगों में दो बच्चे, तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। एक साथ इतने लोगों के बीमार होने से अस्पताल परिसर में भी कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चिकित्सकों ने तत्काल सभी मरीजों को आवश्यक दवाइयां, तरल पदार्थ और अन्य चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। डॉक्टरों का कहना है कि जंगली मशरूम की कुछ प्रजातियां अत्यंत विषैली होती हैं और सामान्य लोगों के लिए उनकी सही पहचान करना आसान नहीं होता, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।

घटना का एक अन्य पहलू भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि परिवार ने उसी फूटू की सब्जी पड़ोस में रहने वाले एक अन्य परिवार को भी चखने के लिए दी थी। सब्जी खाने के बाद वहां के कुछ लोगों में भी फूड पॉइजनिंग के शुरुआती लक्षण दिखाई दिए, जिसके बाद उन्होंने भी अस्पताल पहुंचकर उपचार कराया। इससे स्पष्ट होता है कि जंगली मशरूम की गलत पहचान कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में बरसात के दौरान जंगलों से फूटू एकत्र कर खाने और बाजार में बेचने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि सभी जंगली मशरूम सुरक्षित नहीं होते। कई विषैले मशरूम दिखने में खाद्य प्रजातियों से मिलते-जुलते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन जाती है और अनजाने में लोग उनका सेवन कर लेते हैं।

घटना के बाद जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में जंगलों से लाए गए किसी भी अनजान मशरूम या अन्य प्राकृतिक खाद्य पदार्थ का सेवन बिना विशेषज्ञ पहचान के न करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में थोड़ी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। यदि जंगली मशरूम खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने पर जोर दे रहे हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। खाद्य सुरक्षा और फूड पॉइजनिंग से बचाव संबंधी विस्तृत जानकारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की आधिकारिक वेबसाइट https://www.fssai.gov.in पर उपलब्ध है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan