जांजगीर-चांपा । खेती-किसानी के महत्वपूर्ण सीजन के बीच छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सेमरा गांव से एक कथित शपथ पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस दस्तावेज में गांव के ट्रैक्टर संचालकों द्वारा खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों के लिए एक समान दरें तय करने के साथ-साथ निर्धारित दर से कम कीमत पर काम करने वाले ट्रैक्टर मालिकों पर 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का उल्लेख किया गया है। वायरल दस्तावेज सामने आने के बाद किसानों, ट्रैक्टर संचालकों और स्थानीय लोगों के बीच इसकी वैधता और प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस शपथ पत्र की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और इसकी सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वायरल हो रहे कथित शपथ पत्र के अनुसार खेत की जुताई के लिए सिंगल कल्टीवेटर का किराया 1500 रुपये प्रति घंटा तथा डबल कल्टीवेटर का किराया 1700 रुपये प्रति घंटा तय किया गया है। इसके अलावा ट्रैक्टर ट्रिप का शुल्क 600 रुपये निर्धारित बताया गया है। सबसे अधिक चर्चा उस नियम को लेकर हो रही है जिसमें कहा गया है कि यदि कोई ट्रैक्टर संचालक तय दर से कम कीमत पर किसी किसान के खेत में कार्य करता है तो उससे 21 हजार रुपये नगद जुर्माना वसूला जाएगा। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि गांव के सभी ट्रैक्टर संचालक एक समान दर पर ही कार्य करेंगे ताकि आपसी प्रतिस्पर्धा समाप्त रहे और किसी प्रकार की रेट वार की स्थिति न बने।
कथित शपथ पत्र में कुछ अन्य शर्तें भी दर्ज हैं, जिन्होंने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई किसान जुताई के लिए दूसरे गांव से ट्रैक्टर बुलाता है तो भविष्य में गांव का कोई भी स्थानीय ट्रैक्टर संचालक उसके खेत में काम नहीं करेगा। साथ ही यदि किसी ट्रैक्टर द्वारा कोई कार्य बीच में अधूरा छोड़ दिया जाता है तो उसे केवल गांव का ही दूसरा ट्रैक्टर संचालक पूरा करेगा। इन प्रावधानों को लेकर छोटे और सीमांत किसानों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह के नियम किसानों की स्वतंत्रता सीमित करते हैं और प्रतिस्पर्धा खत्म होने से खेती की लागत बढ़ सकती है। वहीं कुछ ट्रैक्टर संचालकों का तर्क है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, मजदूरी और रखरखाव की लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए एक समान दर तय करना उनकी आर्थिक मजबूरी है।
मामला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस कथित शपथ पत्र की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में सेवाओं की दरों को लेकर सामूहिक निर्णय लिया जाता है तो उसका कानूनी और प्रतिस्पर्धात्मक पहलू भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे मामलों में प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच आवश्यक होती है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वायरल दस्तावेज वास्तविक है या नहीं तथा उसमें दर्ज नियम किसी कानून या प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लंघन तो नहीं करते। फिलहाल स्थानीय प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रतिस्पर्धा कानून और उसके प्रावधानों से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है: https://www.cci.gov.in।https://www.cci.gov.in%E0%A5%A4







