छत्तीसगढ़। लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश ने बिलासपुर शहर की व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए ड्रेनेज सिस्टम की पोल उस समय खुल गई, जब शहर के निचले इलाकों से लेकर कई प्रमुख कॉलोनियां छह से आठ फीट तक पानी में डूब गईं। हालात इतने भयावह हो गए कि कई परिवारों को पूरी रात पहली मंजिल पर शरण लेकर बितानी पड़ी। इस आपदा के बीच एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों घरों में पानी घुसने से लाखों-करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। लगातार जलभराव से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया और शहर के कई हिस्सों में सड़क संपर्क भी बाधित हो गया।
गुरुवार रात से शुरू हुई तेज बारिश शुक्रवार तक जारी रही, जिसके चलते शहर के प्रमुख मार्गों पर नाले और नालियां उफान पर आ गईं। कई स्थानों पर सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और पानी सीधे रिहायशी इलाकों में घुस गया। अरपापार, रायपुर रोड, सकरी और शहर की बाहरी सीमाओं पर विकसित नई कॉलोनियों के साथ-साथ देवनंदन नगर फेस-1 और फेस-2, गीतांजलि सिटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा और जबड़ापारा जैसे क्षेत्रों में हालात सबसे अधिक खराब रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 20 से 25 वर्षों में उन्होंने कई बार भारी बारिश देखी, लेकिन इस बार पहली बार घरों के भीतर इस स्तर तक पानी घुसा है। जमीनी मंजिल पूरी तरह जलमग्न होने के कारण लोगों को जरूरी सामान लेकर ऊपरी मंजिलों पर शरण लेनी पड़ी। घरों में रखे फ्रिज, वाशिंग मशीन, कूलर, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और खाद्यान्न तक पानी में डूब गए, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
स्थिति गंभीर होने पर जिला प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया, जहां जलस्तर अधिक होने के कारण पैदल आवागमन भी संभव नहीं था। राहत दलों ने नाव और ट्रैक्टरों की सहायता से बाढ़ प्रभावित कॉलोनियों में पहुंचकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। प्रशासन लगातार जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें, मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के हेल्पलाइन नंबरों पर तत्काल संपर्क करें। इस घटना ने एक बार फिर शहरी जल निकासी व्यवस्था, ड्रेनेज सिस्टम की गुणवत्ता और मानसून पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल निकासी की व्यवस्था समय रहते प्रभावी बनाई जाती तो इस स्तर की तबाही से काफी हद तक बचा जा सकता था। फिलहाल प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, जबकि प्रभावित परिवार सामान्य स्थिति लौटने का इंतजार कर रहे हैं।https://mausam.imd.gov.in/







