
रायपुर। मानसून के आगमन से पहले छत्तीसगढ़ के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति ने राहत भरी तस्वीर पेश की है। जल संसाधन विभाग की 4 जून 2026 की टैंक गेज रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 46 प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई जलाशयों में कुल 52.94 प्रतिशत जल भराव दर्ज किया गया है, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 4 जून 2025 को यही जल भंडारण स्तर 26.26 प्रतिशत था, जबकि 4 जून 2024 में यह 31.77 प्रतिशत दर्ज किया गया था। बेहतर जल संग्रहण को आगामी खरीफ सीजन, पेयजल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। जल संसाधन और सिंचाई संबंधी आधिकारिक जानकारी के लिए Chhattisgarh Water Resources Department उपयोगी स्रोत हो सकता है।https://wrd.cg.gov.in?utm_source=chatgpt.com
राज्य के 12 प्रमुख जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 5,355.71 मिलियन घन मीटर है, जिसके मुकाबले वर्तमान में 2,948.53 मिलियन घन मीटर पानी उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का 55.05 प्रतिशत जल संग्रहित है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 32.25 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2024 में यह केवल 26.14 प्रतिशत दर्ज किया गया था। वहीं राज्य के 34 मध्यम जलाशयों में भी जल भराव की स्थिति उत्साहजनक बनी हुई है, जहां वर्तमान में औसत 41.68 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य या बेहतर रहता है तो इस वर्ष सिंचाई और जल प्रबंधन की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
राज्य के प्रमुख जलाशयों की स्थिति पर नजर डालें तो मिनीमाता (बांगो) जलाशय में वर्तमान में 56.42 प्रतिशत जल भराव दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह केवल 25.79 प्रतिशत था। इसी प्रकार रविशंकर सागर (गंगरेल) में 48.97 प्रतिशत, तांदुला में 46.08 प्रतिशत, दूधावा में 77.21 प्रतिशत, खारंग में 65.06 प्रतिशत, सोंढूर में 62.75 प्रतिशत और मुरूमसिल्ली जलाशय में 82.30 प्रतिशत जल उपलब्ध है। जल विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर जल भंडारण केवल सिंचाई के लिए ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम करने और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में भी मददगार साबित हो सकता है। हालांकि विभागीय अधिकारी यह भी मानते हैं कि जल संरक्षण और नियंत्रित उपयोग की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है, क्योंकि मानसून की वास्तविक स्थिति आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी।







