
धमतरी। रविवार की सुबह कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास स्थित गौरी नगर कॉलोनी में एक मादा भालू के घुस आने से इलाके में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह लोगों की नींद उस समय खुली जब कॉलोनी में भालू के घूमने और गलियों में भागदौड़ करने की खबर तेजी से फैल गई। कलेक्ट्रेट रोड और आसपास के रहवासी दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायपुर जंगल सफारी से ट्रेंकुलाइजर विशेषज्ञ टीम को भी तत्काल बुलाया गया, क्योंकि कुछ ही समय बाद राज्यपाल के कलेक्ट्रेट पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित था।
जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 5:45 बजे वन विभाग को भालू के शहर में घुसने की सूचना मिली। तब तक वह गौरी नगर की कई गलियों में घूम चुका था और बाद में सड़क किनारे स्थित एक बाड़ी में जाकर छिप गया। मौके पर डीएफओ श्री कृष्णा जाधव, सीएसपी, एसडीओ सहित वन और पुलिस विभाग के अधिकारी पहुंचे। भालू को सुरक्षित पकड़ना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि वह रिहायशी क्षेत्र में था और किसी भी समय लोगों पर हमला कर सकता था। नगर निगम से जेसीबी मशीन मंगाई गई, जिसकी मदद से ट्रेंकुलाइजर टीम को बाड़ी के ऊपर पहुंचाया गया। प्रारंभिक प्रयास के बाद जैसे ही जेसीबी अंदर बढ़ी, भालू वहां से निकलकर नहर किनारे भाग गया।
वन विभाग की टीम ने तेजी दिखाते हुए नहर किनारे उसे घेर लिया और पहला ट्रेंकुलाइजर शॉट लगाया, जो सफल रहा। बेहोशी का असर शुरू होते ही भालू भागते-भागते गौरी नगर गली नंबर 2 के पास एक मकान के पीछे निढाल होकर बैठ गया। इसके बाद दो और शॉट लगाए गए, लेकिन तेज हवा के कारण वे सटीक नहीं लग सके। इसी दौरान टीम के एक सदस्य ने साहस दिखाते हुए पास जाकर बेहोशी का इंजेक्शन दिया। कुछ देर निगरानी के बाद भालू पूरी तरह शांत हो गया और फिर रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया गया।
बेहोशी की हालत में भालू को ग्रीन मैट से ढककर स्ट्रेचर के जरिए पिंजरे में रखा गया। इसके बाद पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका इलाज शुरू किया। उसे दो बोतल सलाइन चढ़ाई गई और एंटीडोट देकर होश में लाया गया, ताकि ट्रेंकुलाइजेशन से उसके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। लगभग एक घंटे तक निगरानी और उपचार के बाद उसे सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली और प्रशासन की तत्परता की सराहना की।
डीएफओ श्री कृष्णा जाधव ने बताया कि पकड़ा गया भालू मादा थी, जिसकी उम्र लगभग 6 से 7 वर्ष और वजन करीब 100 किलोग्राम था। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी, पानी की कमी और वन क्षेत्र कम होने के कारण जंगली जानवर अक्सर शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें और स्वयं किसी प्रकार की जोखिम न लें। वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के लिए त्वरित सूचना और सतर्कता बेहद जरूरी है। वन विभाग से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://moef.gov.in/ देखी जा सकती है।
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