छत्तीसगढ़। राजधानी रायपुर में एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारक द्वारा बीमा कंपनी पर इलाज के दौरान सहायता नहीं देने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। रायपुर निवासी कृष्णा छाबड़िया ने दावा किया है कि नियमित रूप से प्रीमियम जमा करने और पॉलिसी सक्रिय होने के बावजूद बीमारी के दौरान उन्हें अपेक्षित बीमा सहायता नहीं मिल सकी। उन्होंने इस संबंध में स्थानीय पुलिस से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। मामला ऐसे समय सामने आया है, जब स्वास्थ्य बीमा सेवाओं और कैशलेस इलाज प्रक्रिया को लेकर लोगों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार वे पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का प्रीमियम जमा कर रही हैं। हाल ही में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रायपुर स्थित वेंकटेश अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद इलाज के लिए बीमा कंपनी के माध्यम से कैशलेस सुविधा और क्लेम प्रक्रिया शुरू की गई। आरोप है कि आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद कंपनी की ओर से अलग-अलग कारण बताते हुए बीमा सहायता देने से इनकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि बीमारी की गंभीर स्थिति में इस प्रकार की स्थिति से उन्हें मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले को लेकर उन्होंने न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज कर न्याय की मांग की है।
इधर, स्वास्थ्य बीमा क्लेम के निपटान को लेकर समय-समय पर उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, किसी भी कंपनी या मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होता है। बीमा क्षेत्र से जुड़े मामलों में उपभोक्ता बीमा लोकपाल, बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) या संबंधित शिकायत निवारण तंत्र का भी सहारा ले सकते हैं। स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी शिकायतों और उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी के लिए आईआरडीएआई शिकायत पोर्टल उपयोगी हो सकता है।







