दिल्ली। उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जिले में सामने आए एक दिल दहला देने वाले ऑनर किलिंग मामले ने एक बार फिर भारतीय समाज की उस कठोर मानसिकता को उजागर कर दिया है, जहां आज भी जाति, धर्म और सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर रिश्तों का गला घोंटा जा रहा है। पुलिस के मुताबिक एक मुस्लिम ऑटो चालक ने अपनी नाबालिग बेटी की हत्या केवल इस आशंका में कर दी कि वह किसी दूसरे समुदाय के युवक से संबंध बना सकती है। आरोपी ने अपनी बहन और बहनोई के साथ मिलकर पहले बेटी की हत्या की और फिर पहचान छिपाने के लिए शव के कई टुकड़े कर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए। घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और समाज के उस विरोधाभास को सामने रखा है, जहां एक ओर युवा पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक और सामाजिक अहंकार आज भी लोगों को हिंसा की ओर धकेल रहा है।
भारतीय समाज लंबे समय से परंपराओं और आधुनिकता के बीच संघर्ष करता दिखाई देता है। एक तरफ अदालतें वयस्कों को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता देती हैं, वहीं दूसरी ओर अलग जाति या धर्म में विवाह करने पर परिवार और समाज का दबाव कई बार जानलेवा साबित होता है। देश के बड़े राजनीतिक परिवारों, फिल्मी हस्तियों और कारोबारी घरानों में अंतरधार्मिक और अंतरजातीय विवाह सामान्य रूप से स्वीकार किए जाते हैं, लेकिन मध्यमवर्गीय और ग्रामीण समाज में ऐसे रिश्तों को आज भी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि कई मामलों में परिवार के लोग ही अपनी बेटियों या उनके साथियों के खिलाफ हिंसक कदम उठा लेते हैं। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनर किलिंग केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामूहिक मानसिकता की उपज है, जिसमें परिवार की इज्जत को लड़कियों की पसंद और स्वतंत्रता से जोड़ दिया जाता है।
पितृसत्तात्मक सोच इस समस्या की सबसे बड़ी जड़ मानी जाती है। अक्सर देखा गया है कि परिवार के लड़कों द्वारा दूसरे समाज की लड़की से विवाह करने पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं होती, जैसी लड़कियों के मामले में देखने को मिलती है। यही दोहरा मापदंड समाज की गंभीर विडंबना को उजागर करता है। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा, संवाद और कानूनी जागरूकता के बिना इस मानसिकता को बदलना आसान नहीं होगा। देश में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि आधुनिकता केवल तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट भी कई बार ऑनर किलिंग को जघन्य अपराध बताते हुए राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुका है। मामले से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्टें देखी जा सकती हैं।https://www.ncrb.gov.in?utm_source=chatgpt.com







