छत्तीसगढ़। कोंडागांव जिले के मुलमुला धान खरीदी केंद्र में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। यहां से करीब 7132 बोरे धान गायब होने की जानकारी सामने आई है, जिसकी कीमत समर्थन मूल्य के आधार पर लगभग 90 लाख रुपये आंकी जा रही है। मामले ने जिले की धान खरीदी व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि किसानों से धान की खरीदी कर उसकी ऑनलाइन एंट्री भी दर्ज की गई थी और बाद में मिलरों को उठाव के लिए डिलीवरी ऑर्डर जारी किए गए। लेकिन जब मिलरों की गाड़ियां गोदाम से धान उठाने पहुंचीं, तब वहां धान के बोरे ही मौजूद नहीं मिले। इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर प्रशासन और खाद्य विभाग सक्रिय हो गया है।
जानकारी के अनुसार जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया के तहत मुलमुला केंद्र में बड़ी मात्रा में धान जमा दिखाया गया था। रिकॉर्ड में खरीदी और भंडारण की प्रक्रिया पूरी बताई गई, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग निकली। मिलरों ने जब निर्धारित प्रक्रिया के तहत उठाव शुरू करना चाहा, तब गोदाम में धान का स्टॉक नहीं मिला। इसके बाद मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची। खाद्य विभाग ने तत्काल खरीदी प्रभारी और लेम्प्स प्रबंधक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है और फर्जी खरीदी या रिकॉर्ड में हेराफेरी जैसी आशंकाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं लेम्प्स प्रबंधक ने प्रारंभिक स्तर पर ऑनलाइन एंट्री में तकनीकी गड़बड़ी की संभावना जताई है। उनका कहना है कि संभव है धान के बोरे किसी अन्य स्थान पर रखे गए हों, हालांकि अब तक इसका कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।
जिले में कुल 67 उपार्जन केंद्रों में इस सीजन में लाखों क्विंटल धान की खरीदी और उठाव का काम किया जा चुका है। प्रशासन लगातार सीसीटीवी निगरानी, ऑनलाइन रिकॉर्डिंग और सख्त मॉनिटरिंग के दावे करता रहा है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय किसानों और मिलरों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर है, तो इससे सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीदी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित भौतिक सत्यापन और स्वतंत्र ऑडिट की आवश्यकता है। धान खरीदी और समर्थन मूल्य से जुड़ी आधिकारिक जानकारी खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने जिले की धान खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

