पांच साल से सीमांकन को तरसता किसान, मगरलोड तहसील पर उठे गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़। प्रदेश सरकार जहां राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और त्वरित समाधान के दावे कर रही है, वहीं धमतरी जिले की मगरलोड तहसील से सामने आया एक मामला इन दावों की हकीकत बयान कर रहा है। ग्राम मारागांव निवासी किसान रोशन दास पिछले पांच वर्षों से अपनी कृषि भूमि के सीमांकन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। किसान ने वर्ष 2020 में अपनी भूमि खसरा नंबर 20, 66, 68 और 78 के सीमांकन के लिए विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था और निर्धारित शासकीय शुल्क भी जमा किया था, इसके बावजूद राजस्व विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित किसान के अनुसार, कई बार तहसील कार्यालय और राजस्व अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। जब लंबे समय तक सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने 6 मई 2025 को नायब तहसीलदार न्यायालय मगरलोड में दोबारा आवेदन और चालान की प्रतियां जमा कर सीमांकन कराने की मांग की। न्यायालय की ओर से राजस्व निरीक्षक को सीमांकन के निर्देश भी जारी किए गए, लेकिन इसके बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ पाया। राजस्व अमले की ओर से “पटवारी की तबीयत खराब है” और “शासकीय कार्य में व्यस्तता है” जैसे कारण बताकर कार्रवाई टाल दी गई।

सीमांकन लंबित रहने से किसान को खेती-किसानी में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट नहीं होने के कारण मेढ़बंदी नहीं हो पा रही है और पड़ोसी किसानों के साथ विवाद की स्थिति भी बन रही है। किसान रोशन दास अब आवेदन, चालान और ज्ञापनों की प्रतियां लेकर जिला कलेक्टर के जनदर्शन तक पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर सीमांकन हो जाता तो उन्हें वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

इस पूरे मामले ने मगरलोड तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब न्यायालय से आदेश जारी हो चुका था तो आखिर सीमांकन की प्रक्रिया वर्षों तक लंबित क्यों रखी गई। वहीं बिना ई-कोर्ट में प्रकरण दर्ज किए आदेश जारी होने की बात भी सामने आ रही है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। राजस्व मामलों से जुड़े जानकारों का मानना है कि सीमांकन जैसे मामलों में देरी ग्रामीण क्षेत्रों में विवाद और तनाव को बढ़ावा देती है, इसलिए प्रशासन को ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले भखारा तहसील में सीमांकन कार्य में लापरवाही के मामले में एक राजस्व निरीक्षक पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। ऐसे में अब मगरलोड के इस मामले में भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है। हालांकि संबंधित राजस्व निरीक्षक ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था और अब प्रकरण का अवलोकन कर जल्द निराकरण किया जाएगा। प्रदेश में राजस्व व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है, जिसकी जानकारी छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग पर भी उपलब्ध है, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही की ऐसी घटनाएं व्यवस्था की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर रही हैं।https://revenue.cg.nic.in/?utm_source=chatgpt.com

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan