नगरी नगर पंचायत में कमीशनखोरी के आरोपों से गरमाई सियासत, सड़क पर उतरी सभापति

छत्तीसगढ़। नगरी नगर पंचायत में कथित कमीशनखोरी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहरा गया है। भाजपा समर्थित नगर पंचायत सभापति विनीता कोठारी ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) यशवंत वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। सभापति का आरोप है कि पार्षद निधि की राशि जारी करने के एवज में उनसे 30 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। उनका कहना है कि कमीशन देने से इनकार करने के बाद पिछले करीब एक वर्ष से विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि रोक दी गई है, जिसके कारण कई वार्डों में जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। नगरी नगर पंचायत से जुड़ी प्रशासनिक जानकारी राज्य शासन की आधिकारिक वेबसाइट Urban Administration and Development Department Chhattisgarh पर उपलब्ध है।

यह मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब सभापति विनीता कोठारी हाथों में बैनर लेकर सड़क पर उतर आईं और अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान “पैसा बोलता है, यह दुनिया है कालाबाजार” गीत के माध्यम से उन्होंने नगर पंचायत प्रशासन पर निशाना साधा। इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। सभापति ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है और वार्डों के नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने “सुशासन तिहार” अभियान के तहत भी शिकायत दर्ज कराते हुए सीएमओ की संपत्ति और नगर पंचायत में हुए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

दूसरी ओर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी यशवंत वर्मा ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि सभापति जिन कार्यों को स्वीकृत कराने का दबाव बना रही थीं, वे निर्धारित कार्ययोजना और शासन की गाइडलाइन में शामिल नहीं थे। सीएमओ के मुताबिक नगर पंचायत के कार्य शासन के नियमों और वित्तीय स्वीकृति के आधार पर ही किए जा सकते हैं तथा नियमों से बाहर जाकर किसी प्रकार की मंजूरी देना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार संचालित की जा रही हैं।

इस पूरे विवाद ने नगरी नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि शासन स्तर पर मामले की जांच होती है या नहीं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते टकराव ने स्थानीय विकास कार्यों और नगर पंचायत की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan