कुरुद। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत संचालित पीएम आवास प्लस 2.0 सर्वे के बाद जारी पात्रता सूची को लेकर धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड में ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले की 370 ग्राम पंचायतों में कराए गए सर्वे के दौरान कुल 84 हजार 439 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन सूची जारी होने के बाद 11 हजार से अधिक आवेदनों को अपात्र घोषित कर सूची से बाहर कर दिया गया। इसके बाद कई गांवों में पात्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने नाम दोबारा जोड़ने की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष गुहार लगा रहे हैं। हाल के दिनों में सैकड़ों ग्रामीणों ने जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव तथा रोजगार सहायकों की मिलीभगत से वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के नाम सूची से हटा दिए गए, जबकि पहले से पक्के मकान, ट्रैक्टर और हार्वेस्टर जैसी सुविधाओं वाले लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए गए हैं।
ग्रामीणों के बढ़ते दबाव के बीच कुरुद जनपद क्षेत्र के सदस्य हिमांशु साहू, सिन्धु बैस, गंगा साहू और डिगेश्वरी देवांगन भी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से मिलने पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के भाठागांव, राखी, मरौद, कुर्रां, सिहाद, कोसमर्रा, देवरी, जामगांव, सरबदा, जरवायडिही, खपरी, कल्ले, मुल्ले, रामपुर, गाड़ाडीह, भेलवाकूदा और सिलघट सहित अनेक गांवों के सैकड़ों पात्र परिवारों के नाम सूची से विलोपित कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि प्रभावित ग्रामीण प्रतिदिन उनके पास पहुंचकर नाम जुड़वाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों अथवा ग्राम सभा को पात्र हितग्राहियों के नाम जोड़ने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूची तैयार करने और नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कोई राय नहीं ली गई, जिससे जनता के बीच उन्हें लगातार जवाबदेही का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद सदस्यों का कहना है कि जब इस संबंध में अधिकारियों से सवाल किए जाते हैं तो तकनीकी त्रुटि अथवा एआई आधारित सॉफ्टवेयर की गलती का हवाला दिया जाता है। उनका मानना है कि यदि पात्र परिवार तकनीकी कारणों से सूची से बाहर हो रहे हैं तो ऐसी व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें। सत्तापक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर पहले ही ग्रामीणों में असंतोष है और अब प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में सामने आई गड़बड़ियों ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
इस मामले में प्रधानमंत्री आवास योजना के कुरुद विकासखंड समन्वयक संतोष साहू ने बताया कि सेल्फ सर्वे और असिस्टेंट सर्वे के माध्यम से करीब 27 हजार लोगों का पंजीयन किया गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि तकनीकी कारणों से कुछ नाम सूची से विलोपित हो गए हैं। विभाग द्वारा इस समस्या की जानकारी उच्च स्तर पर भेजी गई है और पात्र हितग्राहियों के नामों में सुधार के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यदि तकनीकी स्तर पर हुई त्रुटियों की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उनका निराकरण किया जाएगा, जिससे पात्र परिवारों को योजना का लाभ मिल सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और दिशा-निर्देश ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट https://pmayg.nic.in/ पर देखे जा सकते हैं।







