बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बिलासपुर हाई कोर्ट की ताजा स्टेटस रिपोर्ट को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाई कोर्ट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 15 से अधिक वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में आपराधिक मामले लंबित हैं। इन नेताओं पर कुल 20 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनकी सुनवाई राज्य के अलग-अलग जिलों की अदालतों और विशेष न्यायालयों में चल रही है। रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों और उनकी सुनवाई की गति को लेकर बहस शुरू हो गई है।
हाई कोर्ट की सूची में प्रदेश के कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व सांसद मधुसूदन यादव जैसे नेताओं के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। न्यायालय ने इन मामलों की प्रगति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं और संबंधित अदालतों से नियमित स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले में बालेश्वर साहू, वेदप्रकाश साहू और गौतम राठौर के खिलाफ धोखाधड़ी और मारपीट से जुड़े मामले लंबित हैं, जबकि कवर्धा की अदालत में अशोक कुमार साहू और अन्य के खिलाफ दर्ज मामलों में गवाही और साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है।
राजनांदगांव की विशेष अदालत में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और मोहम्मद खालिद के खिलाफ छह अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इनमें से कुछ मामलों में संबंधित पक्षों को हाई कोर्ट से अंतरिम राहत भी मिली हुई है। वहीं, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं। रायपुर की विशेष अदालत में विधायक कवासी लखमा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) का मामला लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से कवासी लखमा और विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में भी न्यायालय में लगातार सुनवाई चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। हाई कोर्ट इन मामलों की प्रगति पर नजर बनाए हुए है ताकि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई से न्याय व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होता है और राजनीतिक जीवन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है। इस संबंध में अधिक जानकारी और न्यायालय से जुड़ी आधिकारिक सूचनाएं छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। https://highcourt.cg.gov.in?utm_source=chatgpt.com







