निःस्वार्थ सेवा की मिसाल बनीं शिखा सिंह, शिक्षा से खेल तक बदल रहीं तस्वीर

पेण्ड्रा। सीमित संसाधनों के बावजूद समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहीं श्रीमति शिखा सिंह आज गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और खेल प्रोत्साहन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में उभरकर सामने आई हैं। बिना किसी सरकारी सहायता या वित्तीय लाभ के पिछले कई वर्षों से वे लगातार सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों, महिलाओं तथा युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही हैं।

शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानने वाली शिखा सिंह ने स्थानीय स्तर पर सैकड़ों बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की पहल की है। वे केवल शैक्षणिक पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के नैतिक, बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान देती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता को देखते हुए वे लगातार ऐसे प्रयास कर रही हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें। उनका मानना है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बड़े शहरों के विद्यार्थियों के समान अवसर मिलना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जा रहा है। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जागरूकता शिविर, कौशल विकास कार्यशालाएं तथा सिलाई-कढ़ाई और हस्तशिल्प आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं। सामाजिक कुरीतियों जैसे बाल विवाह, घरेलू हिंसा और महिलाओं की शिक्षा में बाधा बनने वाली मानसिकता के विरुद्ध वे लगातार जागरूकता अभियान चलाती रही हैं। उनके प्रयासों का प्रभाव यह है कि कई महिलाएं न केवल स्वयं शिक्षित हो रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी शिक्षित और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी शिखा सिंह की सक्रियता लगातार दिखाई देती है। उन्होंने क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान चलाने के साथ ही जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से कई स्थानों पर हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सामुदायिक प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

खेल के क्षेत्र में भी शिखा सिंह ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी निजी भूमि पर स्वयं के व्यय से निःशुल्क खेल प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की है, जहां जिले के लड़के और लड़कियों को खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेष रूप से बालिकाओं को क्रिकेट सहित अन्य खेलों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। खेल के माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है। सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी पहलें आज ग्रामीण छत्तीसगढ़ में बदलाव की एक नई मिसाल बनती नजर आ रही हैं।

समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय अभियानों की जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त की जा सकती है।

यह खबर भी पढ़ें – महिला स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का संदेश, बचरवार में सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम आयोजित – Arpa News 36

Rizwan Rizwi
Author: Rizwan Rizwi