रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के बाद अब राज्य सरकार ‘स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय’ योजना के जरिए प्रदेश के 108 सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने जा रही है। इस योजना के तहत चयनित स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर फोकस रहेगा। शिक्षा विभाग से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ पर जानकारी देखी जा सकती है।https://eduportal.cg.nic.in/?utm_source=chatgpt.com
योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को चयनित स्कूलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्कूलों के मौजूदा बुनियादी ढांचे, उपलब्ध संसाधनों, शिक्षकों की संख्या और रिक्त पदों की पूरी रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत पदों के मुकाबले खाली पड़े पदों की जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगामी प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
शिक्षा विभाग ने चयनित स्कूलों से संबंधित जानकारी 5 जून तक हार्ड और सॉफ्ट कॉपी दोनों माध्यमों से रायपुर स्थित विभागीय कार्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार इसी डेटा के आधार पर शिक्षकों और अन्य आवश्यक स्टाफ की पदस्थापना की जाएगी। सरकार का उद्देश्य नए शैक्षणिक सत्र से पहले इन विद्यालयों में आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि विद्यार्थियों को शुरुआत से ही बेहतर सुविधाओं का लाभ मिल सके। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होती है तो इसका सीधा असर सीखने की गुणवत्ता पर दिखाई देगा।
प्रदेशभर में चयनित 108 स्कूलों में सबसे अधिक 32 स्कूल बिलासपुर संभाग से चुने गए हैं। इसके अलावा दुर्ग संभाग के 26 और रायपुर संभाग के 25 स्कूलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। सरकार ने केवल शहरी क्षेत्रों तक योजना सीमित न रखते हुए आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया है। बस्तर और सरगुजा संभाग के सरकारी स्कूलों को भी योजना में शामिल किया गया है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि योजना तय समय और गुणवत्ता के साथ लागू होती है तो यह सरकारी स्कूलों की छवि बदलने और निजी स्कूलों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।







