रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गुरुवार को एक अलग तरह का प्रदर्शन देखने को मिला, जहां संयुक्त ईसाई समाज के सदस्यों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर आंबेडकर चौक पर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें सबसे चर्चित प्रस्ताव देश के प्रत्येक हिंदू परिवार को 50-50 गाय उपलब्ध कराने का रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि गाय को आस्था और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है तो उसके संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी भी समाज के स्तर पर तय होनी चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि देश में गाय के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी तो खूब होती है, लेकिन जमीन पर संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती। उनका कहना था कि शहरों और गांवों में बड़ी संख्या में गायें सड़कों पर लावारिस घूमती नजर आती हैं, जिससे सड़क हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं और पशुओं की भी असमय मौत हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि गाय को राष्ट्रीय पशु या विशेष संवैधानिक दर्जा दिया जाता है तो उसके संरक्षण की जवाबदेही भी स्पष्ट होगी और इस दिशा में नीति स्तर पर गंभीर कदम उठाए जा सकेंगे। गौवंश संरक्षण से जुड़ी जानकारी के लिए लोग पशुपालन एवं डेयरी विभाग पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।https://dahd.nic.in?utm_source=chatgpt.com
प्रदर्शन के दौरान कुछ वक्ताओं ने हाल के दिनों में चर्चा में रहे उस मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें रायपुर के सुंदर नगर क्षेत्र में रहने वाले एक युवक द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर अपनी उंगली काटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि समाज का एक वर्ग इस विषय को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है और सरकार को इस दिशा में व्यापक संवाद शुरू करना चाहिए। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि केवल भावनात्मक अपील से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि स्थायी नीति, आश्रय व्यवस्था और जिम्मेदार संरचनात्मक बदलाव आवश्यक हैं।
समाज के सदस्यों का कहना था कि यदि गौवंश संरक्षण को लेकर गंभीरता दिखाई जाती है तो केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि समाज, स्थानीय निकायों और परिवारों की भी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपने की बात कही। फिलहाल इस प्रदर्शन और उससे जुड़ी मांगों को लेकर शहर में चर्चा का माहौल बना हुआ है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।







