छत्तीसगढ़। प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बम्लेश्वरी धाम में पारंपरिक पूजा पद्धति और कथित बलि प्रथा को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मंदिर परिसर में बैगा पद्धति से पूजा और मुर्गे की कथित बलि दिए जाने के आरोप के बाद पुलिस ने राज बैगा किशोर नेताम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय आदिवासी गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच वर्षों पुराना विवाद फिर खुलकर सामने आ गया है। मामले को लेकर डोंगरगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जबकि प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। घटना और मंदिर से जुड़ी जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट Maa Bamleshwari Temple Trust पर भी उपलब्ध है।https://www.bamleshwari.com?utm_source=chatgpt.com
जानकारी के अनुसार मां बम्लेश्वरी के ऊपरी मंदिर परिसर में पुराने रोपवे के पास स्थित एक चट्टान को ‘गढ़ माता’ मानकर पारंपरिक बैगा पद्धति से पूजा-अर्चना की गई थी। आरोप है कि इसी दौरान धार्मिक अनुष्ठान के तहत मुर्गे की बलि भी दी गई। घटना की सूचना मिलने के बाद बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने डोंगरगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर परिसर सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार संचालित होता है और यहां किसी भी प्रकार की बलि प्रथा की अनुमति नहीं है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि इस घटना से मंदिर की धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया और मुख्य आरोपी किशोर नेताम को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। डोंगरगढ़ एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने बताया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।
इधर, किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी गोंड समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि मां बम्लेश्वरी पहाड़ी और आसपास के प्राकृतिक देवस्थलों से उनकी पारंपरिक आस्था सदियों पुरानी है। उनका दावा है कि बैगा पद्धति से पूजा-पाठ इस क्षेत्र की लोक संस्कृति और पहचान का हिस्सा रही है। समाज के नेताओं ने आरोप लगाया कि उनकी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं को अपराध के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे समुदाय में नाराजगी बढ़ रही है। आदिवासी संगठनों ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
डोंगरगढ़ में मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी समाज के बीच यह विवाद नया नहीं माना जा रहा। इससे पहले भी नवरात्रि के दौरान गर्भगृह प्रवेश, पंचमी भेंट और पारंपरिक अधिकारों को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है। फिलहाल प्रशासन शांति बनाए रखने के प्रयास में जुटा है, लेकिन जिस तरह दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं, उससे आने वाले दिनों में यह मामला और संवेदनशील हो सकता है।https://www.bamleshwari.com?utm_source=chatgpt.com







