छत्तीसगढ़। जिले में स्कूली बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि शिक्षा विभाग वर्षों से एक ही फर्म को लाभ पहुंचाने की मंशा से निविदा प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जिले के मुखिया कलेक्टर अबिनाश मिश्रा प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता देते हुए धमतरी को प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन और आपूर्ति का जिम्मा लंबे समय से एक ही फर्म को सौंपे जाने को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों का दावा है कि निविदा प्रक्रिया में कथित तौर पर लेनदेन और प्रभाव के जरिए एक विशेष फर्म को लगातार लाभान्वित किया जा रहा है। आरोप यह भी हैं कि निविदा की मूल शर्तों और नियमों को दरकिनार कर प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो इसका सीधा असर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर पड़ सकता है, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
जिले में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही इस व्यवस्था ने निष्पक्षता पर संदेह पैदा कर दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो निविदा प्रक्रिया से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। जनहित से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक माना जा रहा है, ताकि बच्चों की योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित दिशा-निर्देश और सरकारी जानकारी के लिए भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट PM POSHAN योजना देखी जा सकती है।







