छत्तीसगढ़। गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी तक सीमित होकर समय बिताते हैं, वहीं शासकीय प्राथमिक शाला सोंठी की शिक्षिका ममता जायसवाल ग्रामीण बच्चों के लिए सीखने और रचनात्मक विकास का अनूठा माध्यम बनकर सामने आई हैं। पिछले सात वर्षों से वह निःशुल्क समर कैंप का आयोजन कर बच्चों को बुनियादी शिक्षा के साथ कला, विज्ञान, खेल और जीवन कौशल का प्रशिक्षण दे रही हैं। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान में वह किसी प्रकार की फीस नहीं लेतीं, बल्कि स्वयं के खर्च से बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ समापन अवसर पर उपहार और प्रोत्साहन पुरस्कार भी देती हैं।
गांव के पालकों ने शिक्षिका की इस पहल की खुलकर सराहना की है। पालक लक्ष्मीनारायण श्रीवास ने बताया कि उनकी बेटी नियमित रूप से समर कैंप में भाग लेती है और अब तक शिक्षिका ने किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली है। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर प्रदर्शन पर प्रोत्साहन देने के लिए ममता जायसवाल स्वयं अपने संसाधनों से पुरस्कार भी देती हैं, जिससे बच्चों में सीखने का उत्साह बढ़ता है। पालक सुरेश वस्त्रकार और गणेश पटेल का कहना है कि बच्चों के प्रति उनका समर्पण और सेवा भावना प्रेरणादायक है। ग्रामीण परिवेश में सात वर्षों तक लगातार निःस्वार्थ भाव से बच्चों को शिक्षित करना आसान कार्य नहीं है। समर कैंप के माध्यम से बच्चे न केवल पढ़ाई से जुड़े रहते हैं, बल्कि अपनी प्रतिभा को भी निखारने का अवसर प्राप्त करते हैं।
पालक रामकुमार यादव और नरेंद्र केंवट ने बताया कि समर कैंप में शामिल बच्चे घर लौटकर भी नई-नई रचनात्मक गतिविधियों में रुचि लेने लगे हैं, जिससे उनके कौशल विकास में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रतिवर्ष 15 से 20 दिनों तक संचालित होने वाला यह समर कैंप बच्चों के सर्वांगीण विकास में उपयोगी साबित हो रहा है। शिक्षाविदों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की पहल बच्चों को रचनात्मक दिशा देने के साथ उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाती है। मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की बढ़ती निर्भरता के बीच ऐसे प्रयास बच्चों को सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की दिशा में प्रभावी माने जा रहे हैं। शिक्षा और बाल विकास से जुड़ी जानकारी के लिए राज्य शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://eduportal.cg.nic.in भी उपयोगी स्रोत हो सकती है।







