टोल बचाने का शॉर्टकट बना खतरा, ग्रामीणों ने दी चक्काजाम की चेतावनी

कुरुद। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 स्थित मरौद टोल प्लाजा शुरू होने के बाद टोल टैक्स बचाने के लिए रायपुर-धमतरी मार्ग पर चलने वाले भारी और व्यावसायिक वाहनों का दबाव अब ग्रामीण सड़कों पर लगातार बढ़ता जा रहा है। वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग की जा रही इन सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से अंवरी सहित आसपास के गांवों के लोगों को आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा झेलना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थिति यह है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सड़क पर गति अवरोधक नहीं बनाए गए तो ग्रामीणों ने चक्काजाम करने की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार कुरुद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मरौद में टोल प्लाजा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में वाहन चालक टोल शुल्क बचाने के लिए धमतरी से भखारा होते हुए रायपुर और रायपुर से धमतरी आने-जाने के लिए ग्रामीण मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे अंवरी, सिर्वे-भखारा मोड़ और आसपास के गांवों की सड़कें भारी वाहनों की आवाजाही का प्रमुख रास्ता बन गई हैं। ग्राम पंचायत अंवरी के ग्रामीणों ने बढ़ते हादसों पर चिंता जताते हुए जिला पंचायत सभापति कुलेश्वरी गायकवाड़ से सड़क पर गति अवरोधक बनवाने की मांग की थी। सभापति ने सामान्य सभा की बैठक में यह मुद्दा उठाया, लेकिन अधिकारियों ने विभाग में बजट उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर फिलहाल कार्य कराना संभव नहीं बताया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।

पूर्व जनपद सदस्य सुनील गायकवाड़ ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम तथा लोक निर्माण विभाग को ज्ञापन सौंपकर कई बार दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि एनएच-30 से जुड़े अंवरी-सिर्वे-भखारा मोड़ के बीच एडीबी सड़क पर प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन बिना किसी नियंत्रण के गुजर रहे हैं। 12 जुलाई को तीन स्कूली बच्चे एक तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए, जिसके बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। इससे पहले भी इसी मार्ग पर हुई दुर्घटनाओं में एक नगर सैनिक और गांव के एक युवक की जान जा चुकी है।

ग्राम विकास समिति अंवरी के पदाधिकारियों रंजीत जांगड़े, भुखन दीवान और पवन यादव ने बताया कि ग्रामीणों ने हाल ही में बिरेझर पुलिस चौकी पहुंचकर भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और वाहनों की रफ्तार नियंत्रित कराने की मांग की थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 13 जुलाई को प्रशासन को लिखित सूचना देकर स्पष्ट किया गया कि यदि एक सप्ताह के भीतर गति अवरोधक का निर्माण नहीं किया गया तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि जनहित और लोगों की जान से जुड़ा मामला है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि स्कूल, आबादी और ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय, संकेतक और गति अवरोधक समय पर उपलब्ध कराना सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए बेहद जरूरी है। सड़क सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की वेबसाइट https://nhai.gov.in/ पर उपलब्ध है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan