
मुंगेली। युवाओं में समावेशी सोच, संवेदनशीलता और संवाद कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से मदद मीनार फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘समझो तो’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ‘अड्डा-11’ सत्र का सफल आयोजन किया गया। “एकाधिक दृष्टिकोण ढूँढना: प्लूटोरी चेकर” विषय पर आयोजित इस सहभागितापूर्ण सत्र में युवाओं ने विभिन्न सामाजिक मुद्दों और परिस्थितियों को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने और परखने का अभ्यास किया। सत्र का संचालन युवा फैसिलिटेटर धीरज सिंह ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत विषय परिचय और संवाद के साथ हुई, जिसमें प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी भी सामाजिक घटना, कहानी अथवा व्यक्ति को केवल एक ही दृष्टिकोण से समझना कई बार अधूरी और पूर्वाग्रहपूर्ण समझ को जन्म दे सकता है। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की परिस्थितियां, अनुभव, सामाजिक पृष्ठभूमि और भावनात्मक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी विषय पर निष्कर्ष निकालने से पहले सभी पक्षों को जानना और समझना आवश्यक है। इसी सोच को व्यवहार में उतारने के लिए प्रतिभागियों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर रचनात्मक गतिविधियां कराई गईं।
गतिविधि के दौरान सभी समूहों को एक समान घटना दी गई, जिसे अलग-अलग पात्रों और परिस्थितियों के दृष्टिकोण से समझते हुए कहानी के रूप में प्रस्तुत करना था। प्रतिभागियों ने अपनी कहानियों को लिखित और मौखिक दोनों माध्यमों से साझा किया। प्रस्तुतिकरण के दौरान युवाओं ने आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखे तथा अन्य समूहों के विचारों को गंभीरता और सम्मानपूर्वक सुना। इस प्रक्रिया ने प्रतिभागियों को यह समझने में मदद की कि किसी भी परिस्थिति का आकलन करते समय तथ्यों, अनुभवों और विभिन्न दृष्टिकोणों को समान महत्व देना आवश्यक है।
सत्र के दौरान युवाओं ने यह भी महसूस किया कि प्रभावशाली कहानी केवल घटनाओं का क्रम नहीं होती, बल्कि उसमें पात्रों की भावनाएं, संघर्ष, चुनौतियां, समाधान और उससे मिलने वाली सीख भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संवाद और गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में सक्रिय रूप से सुनने की क्षमता, आलोचनात्मक एवं रचनात्मक सोच, समूह में कार्य करने की भावना, आत्मविश्वास और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान जैसे जीवनोपयोगी गुणों का विकास हुआ। पूरे सत्र के दौरान युवाओं की सहभागिता, जिज्ञासा और सीखने के प्रति उत्साह उल्लेखनीय रहा।
सत्र के समापन पर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भविष्य में वे किसी भी सामाजिक मुद्दे, घटना अथवा व्यक्ति के संबंध में राय बनाने से पहले सभी पक्षों को समझने का प्रयास करेंगे। साथ ही, सकारात्मक संवाद और प्रभावशाली कहानी कहने की कला के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कार्य करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। मदद मीनार फाउंडेशन ने बताया कि संस्था का उद्देश्य ऐसे संवादात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव, समावेशी सोच और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को मजबूत करना है।







