छत्तीसगढ़। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण कराने वाले हितग्राहियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। निर्माण सामग्री और मजदूरी दरों में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण निर्धारित राशि में मकान निर्माण पूरा कर पाना कठिन होता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मैनपुर के महामंत्री गेंदु यादव ने सरकार से प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में वृद्धि करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई परिवारों के मकान अधूरे रह गए हैं।
गेंदु यादव ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में स्टील, सीमेंट, रेत, ईंट, गिट्टी, इलेक्ट्रिक सामान, रंग-पेंट, सेनेटरी सामग्री, दरवाजे-खिड़की और टाइल्स जैसी निर्माण सामग्री की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही मजदूरी दरों में भी लगातार इजाफा हुआ है, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत राशि मकान निर्माण की वास्तविक लागत के मुकाबले कम पड़ रही है। उनका कहना है कि सीमित आय वाले परिवारों के लिए मौजूदा अनुदान में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित मकान बनाना बड़ी चुनौती बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई हितग्राही आवास निर्माण अधूरा न छूटे, इसके लिए निजी कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ परिवारों को ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेना पड़ रहा है, जबकि कई लोग अपने जेवर गिरवी रखकर निर्माण कार्य पूरा कराने का प्रयास कर रहे हैं। महंगाई के दबाव के कारण अनेक स्थानों पर आवास निर्माण कार्य धीमा पड़ गया है या बीच में रुक गया है। ऐसे में बरसात का मौसम शुरू होने से पहले अधूरे मकानों को पूरा कराना हितग्राहियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
जनहित से जुड़े इस मुद्दे को देखते हुए स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि सरकार निर्माण लागत के मौजूदा हालात का मूल्यांकन कर प्रधानमंत्री आवास योजना की सहायता राशि में आवश्यक संशोधन करे, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बिना कर्ज के बोझ के अपना घर पूरा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को राहत देने की दिशा में समय पर निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए केंद्र सरकार की वेबसाइट देखी जा सकती है: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)







