सात समुंदर पार से पहुंचे विदेशी मेहमान, मानसून की दस्तक से गांव में बढ़ा उत्साह

छत्तीसगढ़। मानसून की आहट के साथ बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक स्थित ग्राम कटई में एक बार फिर विदेशी मेहमानों की आमद ने ग्रामीणों के चेहरे खिला दिए हैं। शनिवार को लगभग दो सौ की संख्या में साइबेरियन पक्षियों का दल गांव पहुंचा, जिसे स्थानीय लोग आने वाले मानसून का संकेत मानते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के कारण इन पक्षियों का आगमन गांव में उत्साह और उम्मीद का संदेश लेकर आता है। ग्रामीणों का मानना है कि इन पक्षियों की मौजूदगी केवल मौसम परिवर्तन का संकेत नहीं होती, बल्कि वर्षा की संभावित स्थिति का भी आकलन देती है।

ग्राम कटई में बीते करीब दो दशकों से हर वर्ष जून के आसपास इन प्रवासी पक्षियों का आगमन होता रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि ये पक्षी दिसंबर या जनवरी तक आसपास के तालाबों, नदी-नालों और पेड़ों पर डेरा जमाए रखते हैं। दिनभर भोजन की तलाश में इधर-उधर विचरण करने के बाद शाम होते ही इनका कलरव पूरे गांव के वातावरण को जीवंत बना देता है। स्थानीय निवासी चुम्मन वर्मा का कहना है कि इन पक्षियों का आगमन यह संकेत देता है कि अगले पखवाड़े के भीतर मानसून दस्तक दे सकता है। गांव में इन्हें शुभ माना जाता है और लोग इन्हें किसी देवदूत से कम नहीं समझते। ग्रामीणों की मान्यता है कि यदि ये पक्षी बीच मौसम में गांव छोड़ दें, तो इसे सूखे या कमजोर बारिश का संकेत माना जाता है।

इन पक्षियों के संरक्षण को लेकर भी गांव के लोग संवेदनशील नजर आते हैं। ग्रामीण इनके बसेरों के आसपास किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होने देते और प्राकृतिक वातावरण सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं। इसी कड़ी में ग्राम चमारी निवासी अमलेश निषाद ने हाल ही में आयोजित सुशासन शिविर में कटई सहित आसपास के गांवों में एक हजार पीपल के पौधे लगाने का आवेदन दिया है। उनका कहना है कि बीते दो दशकों में जल संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई, जबकि ऐसे प्रयास इन प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। निषाद ने जिला प्रशासन से इस दिशा में गंभीर पहल की मांग भी की है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रवासी पक्षियों का किसी क्षेत्र में नियमित रूप से पहुंचना वहां के पारिस्थितिक संतुलन और जल स्रोतों की उपलब्धता का संकेत माना जाता है। ऐसे में इन पक्षियों का संरक्षण केवल जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। प्रवासी पक्षियों और उनके संरक्षण से जुड़ी जानकारी के लिए भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट National Biodiversity Authority देखी जा सकती है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan